अतिथि शिक्षकों का मानदेय विवाद:ईसी की मंजूरी के बाद भी 149 फैकल्टी को मिलेगा पुरानी दर से वेतन
अतिथि शिक्षकों का मानदेय विवाद:ईसी की मंजूरी के बाद भी 149 फैकल्टी को मिलेगा पुरानी दर से वेतन
विक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन ने 149 गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी को पुरानी दर पर ही वेतन देने का निर्णय लिया है। शिक्षकों को प्रति दिन 1500 रुपए के हिसाब से भुगतान किया जाएगा, जिससे उनका मासिक मानदेय 37,500 रुपए रहेगा। मानदेय वृद्धि को मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी 2023 में उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों के अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी समान वेतन की मांग की थी। जनवरी 2024 में कार्यकारिणी समिति (ईसी) ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन बैठक के मिनट्स अभी तक फाइनल नहीं हुए हैं। कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा के अनुसार, एक-दो दिन में शिक्षकों को पुरानी दर 2.23 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा लेखा विभाग के अनुसार, यदि शिक्षकों को 50,000 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है तो विश्वविद्यालय के कोष पर सालाना 2 करोड़ 23 लाख 50 हजार रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय हर महीने 55.87 लाख रुपए शिक्षकों के वेतन पर खर्च कर रहा है, जो सालाना 6.70 करोड़ रुपए है। यदि वेतन वृद्धि होती है, तो यह खर्च बढ़कर 8.23 करोड़ रुपए सालाना हो जाएगा। आय 17 करोड़, वेतन पर खर्च 60 करोड़ सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय को शिक्षण शुल्क से लगभग 17 करोड़ रुपए की आय हुई, लेकिन स्थायी शिक्षकों, गेस्ट फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों के वेतन पर सालाना 60 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय पर 43 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार बना हुआ है। कम प्रवेश, बढ़ता खर्च चिंता का विषय विक्रम विश्वविद्यालय की 30 अध्ययन शालाओं में 234 कोर्स संचालित होते हैं, जिनकी कुल सीटें 7279 हैं। लेकिन सत्र 2024-25 में मात्र 2914 छात्रों ने प्रवेश लिया, जिससे 4365 सीटें खाली रह गईं। कई डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश नहीं हुआ या केवल 1-2 छात्रों ने ही दाखिला लिया। इससे विश्वविद्यालय की आय प्रभावित हुई है, जबकि व्यय लगातार बढ़ रहा है। विवि को खुद करनी पड़ रही व्यवस्था वर्तमान में विश्वविद्यालय को शासन से सालाना 7.5 करोड़ रुपए का अनुदान मिलता है, लेकिन उसे 13 करोड़ रुपए की राशि विभिन्न मदों में शासन को वापस करनी पड़ती है। ऐसे में वित्तीय संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
विक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन ने 149 गेस्ट और विजिटिंग फैकल्टी को पुरानी दर पर ही वेतन देने का निर्णय लिया है। शिक्षकों को प्रति दिन 1500 रुपए के हिसाब से भुगतान किया जाएगा, जिससे उनका मासिक मानदेय 37,500 रुपए रहेगा। मानदेय वृद्धि को मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी 2023 में उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों के अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी समान वेतन की मांग की थी। जनवरी 2024 में कार्यकारिणी समिति (ईसी) ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन बैठक के मिनट्स अभी तक फाइनल नहीं हुए हैं। कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा के अनुसार, एक-दो दिन में शिक्षकों को पुरानी दर 2.23 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा लेखा विभाग के अनुसार, यदि शिक्षकों को 50,000 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है तो विश्वविद्यालय के कोष पर सालाना 2 करोड़ 23 लाख 50 हजार रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय हर महीने 55.87 लाख रुपए शिक्षकों के वेतन पर खर्च कर रहा है, जो सालाना 6.70 करोड़ रुपए है। यदि वेतन वृद्धि होती है, तो यह खर्च बढ़कर 8.23 करोड़ रुपए सालाना हो जाएगा। आय 17 करोड़, वेतन पर खर्च 60 करोड़ सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय को शिक्षण शुल्क से लगभग 17 करोड़ रुपए की आय हुई, लेकिन स्थायी शिक्षकों, गेस्ट फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों के वेतन पर सालाना 60 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय पर 43 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय भार बना हुआ है। कम प्रवेश, बढ़ता खर्च चिंता का विषय विक्रम विश्वविद्यालय की 30 अध्ययन शालाओं में 234 कोर्स संचालित होते हैं, जिनकी कुल सीटें 7279 हैं। लेकिन सत्र 2024-25 में मात्र 2914 छात्रों ने प्रवेश लिया, जिससे 4365 सीटें खाली रह गईं। कई डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश नहीं हुआ या केवल 1-2 छात्रों ने ही दाखिला लिया। इससे विश्वविद्यालय की आय प्रभावित हुई है, जबकि व्यय लगातार बढ़ रहा है। विवि को खुद करनी पड़ रही व्यवस्था वर्तमान में विश्वविद्यालय को शासन से सालाना 7.5 करोड़ रुपए का अनुदान मिलता है, लेकिन उसे 13 करोड़ रुपए की राशि विभिन्न मदों में शासन को वापस करनी पड़ती है। ऐसे में वित्तीय संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।