पितृपक्ष आज से प्रारंभ:रायसेन के मिश्र तालाब पर तर्पण करने पहुंचे लोग, दूषित पानी को देख जताई नाराजगी
पितृपक्ष आज से प्रारंभ:रायसेन के मिश्र तालाब पर तर्पण करने पहुंचे लोग, दूषित पानी को देख जताई नाराजगी
बुधवार से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो गए हैं। 18 सितंबर से शुरु हुआ पितृपक्ष 2 अक्टूबर तक चलेंगे। अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए लोगों ने नदी, तालाब और अन्य जलाशयों पर पहुंच कर उन्हें पानी देकर तर्पण किया। पुजारी ने विधि-विधान के साथ तर्पण की पूजा अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद घर पर पितरों के मनपसंद व्यंजन बनाकर उनका भोग लगाया। साथ ही पंडितों को भी भोजन कराया। प्राचीन मिश्र तालाब के दूषित पानी में किया तर्पण रायसेन शहर के वार्ड न. 9 में स्थित प्राचीन मिश्र तालाब प्रदूषित है। ऐसी स्थिति में लोगों ने दूषित पानी में ही तर्पण किया। तर्पण करने पहुंचे लोगों ने नाराजगी जाहिर कि उनका कहना था कि शहर का एकमात्र प्राचीन तालाब है, जिसमें वर्षों से तर्पण किया जाता है। यह तालाब लोगों के आस्था का केंद्र भी है, पर नगर पालिका द्वारा अनदेखी के चलते तालाब का पानी दूषित हो गया है। साफ-सफाई नहीं होने से लोगों को दूषित पानी में ही तर्पण करना पड़ रहा है। मिश्र तालाब के घाट पर रमेश गोपाल चतुर्वेदी, दीपक चतुर्वेदी और राजेंद्र दुबे सोमवारा वाले द्वारा पूरे विधि विधान से तर्पण कराया जा रहा था। श्राद्ध पक्ष में पृथ्वी पर आते हैं पूर्वज श्राद्ध पक्ष के इन दिनों में लोग अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। यह भाद्रमास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में पितरों को मुक्त कर देते हैं, जिससे वे स्वजनों के पास जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। कहते हैं कि श्राद्ध के इन दिनों में पितृ अपने घर पर आते हैं। इसलिए उनकी परिजनों को उनका तर्पण करना चाहिए।
बुधवार से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो गए हैं। 18 सितंबर से शुरु हुआ पितृपक्ष 2 अक्टूबर तक चलेंगे। अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए लोगों ने नदी, तालाब और अन्य जलाशयों पर पहुंच कर उन्हें पानी देकर तर्पण किया। पुजारी ने विधि-विधान के साथ तर्पण की पूजा अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद घर पर पितरों के मनपसंद व्यंजन बनाकर उनका भोग लगाया। साथ ही पंडितों को भी भोजन कराया। प्राचीन मिश्र तालाब के दूषित पानी में किया तर्पण रायसेन शहर के वार्ड न. 9 में स्थित प्राचीन मिश्र तालाब प्रदूषित है। ऐसी स्थिति में लोगों ने दूषित पानी में ही तर्पण किया। तर्पण करने पहुंचे लोगों ने नाराजगी जाहिर कि उनका कहना था कि शहर का एकमात्र प्राचीन तालाब है, जिसमें वर्षों से तर्पण किया जाता है। यह तालाब लोगों के आस्था का केंद्र भी है, पर नगर पालिका द्वारा अनदेखी के चलते तालाब का पानी दूषित हो गया है। साफ-सफाई नहीं होने से लोगों को दूषित पानी में ही तर्पण करना पड़ रहा है। मिश्र तालाब के घाट पर रमेश गोपाल चतुर्वेदी, दीपक चतुर्वेदी और राजेंद्र दुबे सोमवारा वाले द्वारा पूरे विधि विधान से तर्पण कराया जा रहा था। श्राद्ध पक्ष में पृथ्वी पर आते हैं पूर्वज श्राद्ध पक्ष के इन दिनों में लोग अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। यह भाद्रमास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में पितरों को मुक्त कर देते हैं, जिससे वे स्वजनों के पास जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। कहते हैं कि श्राद्ध के इन दिनों में पितृ अपने घर पर आते हैं। इसलिए उनकी परिजनों को उनका तर्पण करना चाहिए।