फिलहाल बातचीत के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता: यूक्रेन संघर्ष पर रूसी राजदूत अलीपोव

नयी दिल्ली, 20 नवंबर। रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बुधवार को कहा कि फिलहाल बातचीत के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता लेकिन कीव के साथ बैठकर बातचीत करने के लिए मॉस्को तैयार है, बशर्ते इसका कोई स्वीकार्य आधार हो। अलीपोव ने यहां ब्रिक्स और इसकी संभावनाओं पर आयोजित एक संवाद सत्र के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इस आधार में सबसे पहले जमीनी वास्तविकताएं, सुरक्षा के दृष्टिकोण से रूस के हित और यूक्रेन के भीतर रूसियों तथा रूसी मूल के यूक्रेनी नागरिकों की सुरक्षा शामिल होनी चाहिए। इस सत्र की मेजबानी रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने की। राजदूत ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि वर्तमान में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने पांच साल के कार्यकाल की समाप्ति के बाद पूरी तरह अनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं। जेलेंस्की 21 अप्रैल, 2019 को यूक्रेन के राष्ट्रपति चुने गए थे। अलीपोव ने दावा किया, यूक्रेनी संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राष्ट्रपति बिना चुनाव के पद पर बना रह सके - चाहे युद्ध का समय हो या न हो। इसलिए, इस दृष्टिकोण से, वह पूरी तरह से एक अनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं। उन्होंने सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में ब्रिक्स की सराहना की तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह को नयी वास्तविकताओं का प्रतिबिंब बताया। फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन संघर्ष को मंगलवार को 1,000 दिन पूरे हो गए। यह पूछे जाने पर कि क्या रूस इस संघर्ष का समाधान निकालने के लिए यूक्रेन के साथ बातचीत करने को तैयार है, राजदूत ने कहा, स्पष्ट रूप से कहें तो, (हमें) इस समय वार्ता के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता। अलीपोव ने कहा, हम बैठकर बातचीत करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि बातचीत का कोई आधार हो। उन्होंने कहा, बातचीत के लिए आधार होना चाहिए और बशर्ते इसके लिए स्वीकार्य आधार हो... चाहे वह (वोलोदिमीर) जेलेंस्की हों या कोई अन्य व्यक्ति, यह एक ऐसा प्रश्न है, जिस पर मैं फिलहाल बात नहीं करूंगा। यह पूछे जाने पर कि जब दो बड़े संघर्ष जारी हैं तो क्या ऐसे में निकट भविष्य में कोई नयी विश्व व्यवस्था बनेगी, राजदूत ने कहा, मेरा मानना है कि संघर्ष समाधान के लिए ब्रिक्स एक प्रमुख मंच बनने में पूरी तरह सक्षम है। अलीपोव ने कहा, हमारा मानना है और ब्रिक्स के भीतर की प्रक्रिया एवं चर्चाओं से यह पता चलता है कि ब्रिक्स कम से कम संघर्ष समाधान के लिए चर्चा का एक मंच बनने में सक्षम होगा। यह वर्तमान या भविष्य के संघर्षों को हल करने में सक्षम है या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।(भाषा)

फिलहाल बातचीत के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता: यूक्रेन संघर्ष पर रूसी राजदूत अलीपोव
नयी दिल्ली, 20 नवंबर। रूस-यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बुधवार को कहा कि फिलहाल बातचीत के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता लेकिन कीव के साथ बैठकर बातचीत करने के लिए मॉस्को तैयार है, बशर्ते इसका कोई स्वीकार्य आधार हो। अलीपोव ने यहां ब्रिक्स और इसकी संभावनाओं पर आयोजित एक संवाद सत्र के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इस आधार में सबसे पहले जमीनी वास्तविकताएं, सुरक्षा के दृष्टिकोण से रूस के हित और यूक्रेन के भीतर रूसियों तथा रूसी मूल के यूक्रेनी नागरिकों की सुरक्षा शामिल होनी चाहिए। इस सत्र की मेजबानी रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने की। राजदूत ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि वर्तमान में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने पांच साल के कार्यकाल की समाप्ति के बाद पूरी तरह अनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं। जेलेंस्की 21 अप्रैल, 2019 को यूक्रेन के राष्ट्रपति चुने गए थे। अलीपोव ने दावा किया, यूक्रेनी संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राष्ट्रपति बिना चुनाव के पद पर बना रह सके - चाहे युद्ध का समय हो या न हो। इसलिए, इस दृष्टिकोण से, वह पूरी तरह से एक अनिर्वाचित राष्ट्रपति हैं। उन्होंने सत्र में अपने उद्घाटन भाषण में ब्रिक्स की सराहना की तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह को नयी वास्तविकताओं का प्रतिबिंब बताया। फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन संघर्ष को मंगलवार को 1,000 दिन पूरे हो गए। यह पूछे जाने पर कि क्या रूस इस संघर्ष का समाधान निकालने के लिए यूक्रेन के साथ बातचीत करने को तैयार है, राजदूत ने कहा, स्पष्ट रूप से कहें तो, (हमें) इस समय वार्ता के लिए ज्यादा आधार नहीं दिखता। अलीपोव ने कहा, हम बैठकर बातचीत करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि बातचीत का कोई आधार हो। उन्होंने कहा, बातचीत के लिए आधार होना चाहिए और बशर्ते इसके लिए स्वीकार्य आधार हो... चाहे वह (वोलोदिमीर) जेलेंस्की हों या कोई अन्य व्यक्ति, यह एक ऐसा प्रश्न है, जिस पर मैं फिलहाल बात नहीं करूंगा। यह पूछे जाने पर कि जब दो बड़े संघर्ष जारी हैं तो क्या ऐसे में निकट भविष्य में कोई नयी विश्व व्यवस्था बनेगी, राजदूत ने कहा, मेरा मानना है कि संघर्ष समाधान के लिए ब्रिक्स एक प्रमुख मंच बनने में पूरी तरह सक्षम है। अलीपोव ने कहा, हमारा मानना है और ब्रिक्स के भीतर की प्रक्रिया एवं चर्चाओं से यह पता चलता है कि ब्रिक्स कम से कम संघर्ष समाधान के लिए चर्चा का एक मंच बनने में सक्षम होगा। यह वर्तमान या भविष्य के संघर्षों को हल करने में सक्षम है या नहीं, यह देखना अभी बाकी है।(भाषा)