महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक निलंबित:कन्नौद की पर्यवेक्षक पर विकलांगता प्रमाण पत्र को लेकर विवाद, जुबेदा बानो ने शिकायत को बताया झूठा

महिला व बाल विकास विभाग, कन्नौद में पदस्थ पर्यवेक्षक जुबेदा बानो को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जिला दिव्यांगता बोर्ड, जिला अस्पताल देवास के समक्ष विकलांगता प्रमाण पत्र की सत्यता परीक्षण में उनकी अनुपस्थिति के कारण की गई है। कलेक्टर ने इसे कदाचरण मानते हुए निलंबन का आदेश जारी किया। मामले में पर्यवेक्षक जुबेदा बानो ने कहा कि उनका विकलांगता प्रमाण पत्र स्थायी है, जो जीवन भर मान्य रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि शासन के नियमों के अनुसार, स्थायी प्रमाण पत्र का दोबारा परीक्षण नहीं कराया जा सकता। साथ ही, उन्होंने शिकायत को झूठा और ब्लैकमेलिंग का हिस्सा बताया। शिकायत और निलंबन की पृष्ठभूमि 18 जून 2024 को कन्नौद निवासी नरेंद्र साहू ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी कि जुबेदा बानो ने फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति ली है और वे 10% भी विकलांग नहीं हैं। इस शिकायत पर कलेक्टर ने 7 अगस्त 2024 को प्रमाण पत्र की जांच के आदेश दिए। महिला व बाल विकास विभाग ने पर्यवेक्षक को बार-बार जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष परीक्षण कराने को कहा, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुईं। कलेक्टर ने इसे कदाचरण मानते हुए निलंबन का आदेश दिया। पर्यवेक्षक का पक्ष पर्यवेक्षक जुबेदा बानो ने कहा कि उन्होंने विभाग को 29 अगस्त 2024 को पत्र का उत्तर प्रस्तुत कर दिया था। इसके बाद विभाग से कोई रिमाइंडर नहीं आया, जिससे उन्हें लगा कि विभाग उनके उत्तर से संतुष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता नरेंद्र साहू उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। जुबेदा बानो ने कहा कि वे हाईकोर्ट में इस मामले के खिलाफ याचिका दायर करेंगी।

महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक निलंबित:कन्नौद की पर्यवेक्षक पर विकलांगता प्रमाण पत्र को लेकर विवाद, जुबेदा बानो ने शिकायत को बताया झूठा
महिला व बाल विकास विभाग, कन्नौद में पदस्थ पर्यवेक्षक जुबेदा बानो को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जिला दिव्यांगता बोर्ड, जिला अस्पताल देवास के समक्ष विकलांगता प्रमाण पत्र की सत्यता परीक्षण में उनकी अनुपस्थिति के कारण की गई है। कलेक्टर ने इसे कदाचरण मानते हुए निलंबन का आदेश जारी किया। मामले में पर्यवेक्षक जुबेदा बानो ने कहा कि उनका विकलांगता प्रमाण पत्र स्थायी है, जो जीवन भर मान्य रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि शासन के नियमों के अनुसार, स्थायी प्रमाण पत्र का दोबारा परीक्षण नहीं कराया जा सकता। साथ ही, उन्होंने शिकायत को झूठा और ब्लैकमेलिंग का हिस्सा बताया। शिकायत और निलंबन की पृष्ठभूमि 18 जून 2024 को कन्नौद निवासी नरेंद्र साहू ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी कि जुबेदा बानो ने फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति ली है और वे 10% भी विकलांग नहीं हैं। इस शिकायत पर कलेक्टर ने 7 अगस्त 2024 को प्रमाण पत्र की जांच के आदेश दिए। महिला व बाल विकास विभाग ने पर्यवेक्षक को बार-बार जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष परीक्षण कराने को कहा, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुईं। कलेक्टर ने इसे कदाचरण मानते हुए निलंबन का आदेश दिया। पर्यवेक्षक का पक्ष पर्यवेक्षक जुबेदा बानो ने कहा कि उन्होंने विभाग को 29 अगस्त 2024 को पत्र का उत्तर प्रस्तुत कर दिया था। इसके बाद विभाग से कोई रिमाइंडर नहीं आया, जिससे उन्हें लगा कि विभाग उनके उत्तर से संतुष्ट है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता नरेंद्र साहू उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। जुबेदा बानो ने कहा कि वे हाईकोर्ट में इस मामले के खिलाफ याचिका दायर करेंगी।