वन विभाग में फारेस्ट गार्ड्स की वेतन विसंगति का मामला:2006-14 के बीच नियुक्त फॉरेस्ट गार्ड्स को अलग-अलग वेतनमान, सीनियर को जूनियर से कम सैलरी

मध्य प्रदेश के फारेस्ट गार्ड्स को 165 करोड़ रुपए की वसूली से तो राहत मिल गई, पर स्पष्ट निर्देश होते हुए भी वेतन विसंगति में सुधार नहीं हुआ है। अब भी जनवरी 2006 से सितंबर 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स की सैलरी में अंतर है। सीनियर को अब भी जूनियर से कम सैलरी मिल रही है। इसे लेकर फारेस्ट गार्ड में नाराजगी है और वे जल्द ही विभागीय अधिकारियों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। बता दें कि प्रदेश में 14024 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 12138 फारेस्ट गार्ड कार्यरत हैं। साल 2006 से 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स को असमान वेतन बैंड और ग्रेड-पे देने से भोपाल, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश में 6 हजार 592 फॉरेस्ट गार्ड्स को निर्धारित सैलरी से 165 करोड़ रुपए अधिक दे दिए गए थे। वित्त विभाग ने सैलरी में दी गई अधिक राशि वसूलने को कहा था। इस पर वन विभाग ने वसूली के आदेश भी जारी कर दिए थे, पर बाद में यह गलती विभाग की मानी गई और वसूली पर रोक लगा दी। इस दौरान फारेस्ट गार्ड्स सेवा भर्ती के मूलभूत नियम 22-A-2 के अनुसार फारेस्ट गार्ड्स का फिर से वेतन निर्धारण करने को कहा गया था, पर मैदानी अफसरों ने इस निर्देश को तवज्जो नहीं दी। ऐसे हुई वेतन विसंगति साल 2006 से 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स को किसी वनमंडल में ट्रेनिंग डेट से 5680-1900 का वेतनमान दे दिया गया, तो किसी वनमंडल में नहीं दिया। इस कारण प्रत्येक जिले में फारेस्ट गार्ड्स के सैलरी में अंतर आ गया। किसी की सैलरी ज्यादा हो गई और किसी की कम। जैसे भोपाल संभाग के जिलों में साल 2006-07 में नौकरी में आए फारेस्ट गार्ड्स को 5680-1900 वेतन बैंड-ग्रेड-पे नहीं दे रहे हैं, जबकि सागर, रीवा, जबलपुर संभाग के जिलों में दे रहे हैं। इस कारण पहले नियुक्त होते हुए भी भोपाल के फारेस्ट गार्ड्स सागर, रीवा, जबलपुर संभाग में पदस्थ फारेस्ट गार्ड्स से सैलरी में पीछे हैं।

वन विभाग में फारेस्ट गार्ड्स की वेतन विसंगति का मामला:2006-14 के बीच नियुक्त फॉरेस्ट गार्ड्स को अलग-अलग वेतनमान, सीनियर को जूनियर से कम सैलरी
मध्य प्रदेश के फारेस्ट गार्ड्स को 165 करोड़ रुपए की वसूली से तो राहत मिल गई, पर स्पष्ट निर्देश होते हुए भी वेतन विसंगति में सुधार नहीं हुआ है। अब भी जनवरी 2006 से सितंबर 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स की सैलरी में अंतर है। सीनियर को अब भी जूनियर से कम सैलरी मिल रही है। इसे लेकर फारेस्ट गार्ड में नाराजगी है और वे जल्द ही विभागीय अधिकारियों से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। बता दें कि प्रदेश में 14024 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 12138 फारेस्ट गार्ड कार्यरत हैं। साल 2006 से 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स को असमान वेतन बैंड और ग्रेड-पे देने से भोपाल, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश में 6 हजार 592 फॉरेस्ट गार्ड्स को निर्धारित सैलरी से 165 करोड़ रुपए अधिक दे दिए गए थे। वित्त विभाग ने सैलरी में दी गई अधिक राशि वसूलने को कहा था। इस पर वन विभाग ने वसूली के आदेश भी जारी कर दिए थे, पर बाद में यह गलती विभाग की मानी गई और वसूली पर रोक लगा दी। इस दौरान फारेस्ट गार्ड्स सेवा भर्ती के मूलभूत नियम 22-A-2 के अनुसार फारेस्ट गार्ड्स का फिर से वेतन निर्धारण करने को कहा गया था, पर मैदानी अफसरों ने इस निर्देश को तवज्जो नहीं दी। ऐसे हुई वेतन विसंगति साल 2006 से 2014 के बीच नियुक्त फारेस्ट गार्ड्स को किसी वनमंडल में ट्रेनिंग डेट से 5680-1900 का वेतनमान दे दिया गया, तो किसी वनमंडल में नहीं दिया। इस कारण प्रत्येक जिले में फारेस्ट गार्ड्स के सैलरी में अंतर आ गया। किसी की सैलरी ज्यादा हो गई और किसी की कम। जैसे भोपाल संभाग के जिलों में साल 2006-07 में नौकरी में आए फारेस्ट गार्ड्स को 5680-1900 वेतन बैंड-ग्रेड-पे नहीं दे रहे हैं, जबकि सागर, रीवा, जबलपुर संभाग के जिलों में दे रहे हैं। इस कारण पहले नियुक्त होते हुए भी भोपाल के फारेस्ट गार्ड्स सागर, रीवा, जबलपुर संभाग में पदस्थ फारेस्ट गार्ड्स से सैलरी में पीछे हैं।